- जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ सुरक्षा कार्यों की समीक्षा
- कार्लीगाड़-मझाड़ा पुनर्वास कार्यों का भी किया निरीक्षण
देहरादून। मानसून से पहले देहरादून प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। प्रमुख सचिव एवं जनपद प्रभारी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने गुरुवार को जिला कार्यालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन, जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए।
बैठक में सौंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी क्षेत्र के सुरक्षा कार्यों, नदी सफाई और बाढ़ सुरक्षा योजनाओं की समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने मानसून शुरू होने से पहले लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा। जलभराव से निपटने के लिए उपलब्ध 39 डी-वॉटरिंग पंपों की तैनाती योजना की भी समीक्षा की गई।
उन्होंने आईएसबीटी क्षेत्र की जलनिकासी समस्या के समाधान के लिए विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम गठित कर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा 12 प्रमुख नालों की सफाई एवं सुधार कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही शॉर्ट ड्यूरेशन हाई इंटेंसिटी रेनफॉल वाले क्षेत्रों का डेटा आधारित विश्लेषण कर संभावित जलभराव स्थलों की अग्रिम पहचान पर जोर दिया।
प्रमुख सचिव ने जनपद में चिन्हित 12 लैंडस्लाइड जोन और अन्य भू-संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने तथा स्थायी समाधान विकसित करने के निर्देश दिए। क्लाउड बर्स्ट संभावित क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी तंत्र को और मजबूत बनाने पर भी बल दिया गया।
बैठक में बताया गया कि जिले के 169 नालों में से 153 की सफाई पूरी कर ली गई है। वहीं 89 ऐसे विद्यालय चिह्नित किए गए हैं जो बरसात में नदी-नालों से प्रभावित हो सकते हैं। 73 दूरस्थ गांवों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को मानसून से पहले नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराने की व्यवस्था भी की गई है।
स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए फॉगिंग, जनजागरूकता अभियान और जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। प्रमुख सचिव ने राहत शिविरों, रैन बसेरों और आपदा राहत संसाधनों को पूरी तरह तैयार रखने के साथ ही जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए।
बैठक के बाद प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के साथ कार्लीगाड़ और मझाड़ा क्षेत्र में आपदा प्रभावित स्थलों का निरीक्षण कर पुनर्वास और नदी चैनलाईजेशन कार्यों की प्रगति का जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

