शिक्षा, स्वावलम्बन, समान अवसर तथा सम्मान सशक्त महिला के अधिकार – डीडीओ अनीता पंवार

  • एक शिक्षित महिला से दो प रिवार शिक्षित – डॉ मीनल गुलाटी अधिशाक्षी अभियन्ता

रुद्रप्रयाग : भारतीय कुटुम्ब व्यवस्था विश्व की अनुठी परम्परा है इसका आधार भारतीय महिला है शिक्षा मनुष्य की तीसरी नेत्र है रोटी, कपडा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा, समाज पर हो महिला का समान अधिकार उक्त विचार महिला डेरी विकास द्वारा आयोजित अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बोलते हुए महिला वक्ताओ ने कहा ।

सुमाडी स्थित डिमरी लाज मे महिला डेरी विकास द्वारा दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियो के महिला सदस्यो द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को अनीता पंवार जिला विकास अधिकारी की अध्यक्षता मे मनाया गया । कार्यक्रम का शुभारम्भ पूनम कठैत जिला पचायत अध्यक्ष द्वारा करते हुए महिला ओ के विकास के लिए हर सम्भव मदद करने का आश्वासन दिया ।

अनीता पंवार द्वारा कहा गया कि भारतीय संस्कृति मे महिला को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है शास्त्रो में कहा गया है कि यत्र पुज्यते नारी रमन्ते तत्र देवता । देवो के नाम से पूर्व पत्नी का नाम है सीताराम, राधा कृष्ण, गौरी शंकर, पिता के नाम पर पुत्री राजा जनक की पुत्री जानकी, महाराजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी, राजा मोर की पुत्री मोरनी, तथा माता के नाम पर पुत्र का नाम कुन्ती पुत्र, देवकीनन्दन,अन्जना पुत्र, सूत पुत्र, कहे जाते हैं। महिला की देवी के रूप में पूजा होती है विघा के लिए सरस्वती देवी, धन के लिए लक्ष्मी देवी भारत की वित्त मन्त्री सीतारमन भी महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है। शक्ति के लिए काली देवी, महिला विद्वान, गार्गी, घोषा, अपाला, मैत्री उन्होंने कहा महिला शासक रानी लक्ष्मीवाई, रानी दुर्गावती,, चैन्नमा तथा उत्तराखण्ड की रानी कर्णावती, रानी जिया । महिला स्वतंत्रता के रूप में सीता स्वयमवर, द्रौपदी स्वयंवर आदर्श उदाहरण है। उन्होंने भारतीय संस्कृति को महिला के सर्वागीण विकास का आदर्श उदाहरण बताया वर्तमान समय में शिक्षा, स्वालम्बन, समान अवसर तथा सम्मान, सशक्त महिला अधिकार के लिए भारत सरकार एवं उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यो का वर्णन किया।

डॉ मीनल गुलाटी अधिशाक्षी अभियन्ता ने कहा कि एक महिला शिक्षित होने पर दो परिवार शिक्षित हो जाते है । शिक्षा मनुष्म का तीसरा नेत्र है रोटी, कपडा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा, समाज पर हो महिला का समान अधिकार तभी बनेगा देश महान । उन्होंने पाशचात्य एवं अरब की संस्कृति मे महिलाओ की विभिन्न क्षेत्रो मे भागीदारी एवं स्थिति का भी वर्णन किया तथा कहा कि देश की आजादी के बाद महिला उत्थान तथा महिला सहभागिता के लिए कार्य हुई वर्तमान समय महिला सशक्तिकरण का है महिला किसी भी क्षेत्र मे पुरुषो से पीछे नहीं है ग्रामीण क्षेत्रों से आयी जन प्रतिनिधियो बालिकाओ एवं महिलाओ ने भी कविता गीत भाषण द्वारा अपने विचार रखते हुए महिलाओं को प्रेरित किया अध्यक्षीय उदबोधन मे कहा गया कि महिला पुत्री, बहिन, पत्नी, भाभी,माता, दादी के किरदार निभाती है महिला ही महिला की भ्रूण हत्या कर महापाप करती है सभी महिलाओं द्वारा भ्रूण हत्या रोकने तथा जाग्रति लाने का संकल्प कराया गया । भूपेन्द्र सिंह विष्ट सहायक निदेशक द्वारा कहा गया कि महिला डेरी की योजना केवल महिलाओ के लिए है डेरी के द्वारा स्वरोजगारी एवं स्वालम्बी बनकर पलायन की रोकथाम कर देवभूमि की संस्कृति को बनाये रखे । कार्यक्रम मे शशी नौटियाल पूर्व जिला पचायत अध्यक्ष, अनीता सेमवाल, बबीता कपरवाण, विजयानेगी, बसन्ती राणा, अन्शु राठी, अन्शु देवी, मीना, बबीता, पूजा, नीरज, संचालन सहदेव पुण्डीर द्वारा किया गया ।

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