उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में फलदार पौधों का रोपण, संस्कृत के संरक्षण-संवर्धन पर दिया गया जोर

हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में लोकपर्व हरेला उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर संस्कृत शिक्षा विभाग के सचिव दीपक कुमार ने संस्थान परिसर में फलदार पौधों का रोपण किया और परिसर का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

सचिव दीपक कुमार ने सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वृक्ष प्रकृति का श्रृंगार हैं और पर्यावरण संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

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बैठक के दौरान उन्होंने संस्थान के अधिकारियों को आगामी वर्ष की प्रतियोगिताओं, शोध सम्मेलनों, प्रकाशन कार्यों तथा संस्कृत मास के आयोजन की विस्तृत कार्ययोजना शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सक्रियता से कार्य करने पर बल दिया।

संस्थान के नवनियुक्त सचिव प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार ने सचिव दीपक कुमार का स्वागत करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत को उचित सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संस्थान का पूरा स्टाफ शासन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा।

कार्यक्रम में शोध अधिकारी डॉ. हरीश चंद्र गुरुरानी, प्रकाशन अधिकारी किशोरी लाल रतूड़ी, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष रमा कठैत सहित संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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